संबद्ध कार्यालय

1. आयुध निर्माणी बोर्ड (ओएफबी)

भारतीय आयुध निर्माणियां सबसे पुराना और सबसे बड़ा औद्योगिक स्थापना है जो उत्कृष्ट युद्धभूमि उपकरणों से सैन्य बलों को सुसज्जित करने में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के प्रारंभिक उद्देश्य के साथ आयुध निर्माणी बोर्ड (ओएफबी) के अंतर्गत कार्य करता है

आयुध निर्माणियों की प्रमुख सक्षमताः

हथियार छोटे, मध्यम और बड़े कैलीबर हथियार एवं मोर्टार उपकरण
गोलाबारूद, विस्फोटक एवं प्रोप्लेंट छोटे, मध्यम एवं बड़े कैलीबर गोलाबारूद, मोर्टार बम, संकेतक एवं संबद्ध मदें, रॉकेट एवं एरियल बम, फ्यूज, विस्फोटक, रसायन व प्रोप्लेंटस
सैन्य वाहन ट्रक, सुरंगरोधी एवं विशेष सुरक्षा वाले वाहन
कवचित वाहन टैंक व इसके संस्करण, कवचित सैनिक वाहक (एपीसी) एवं इंजन
औजार एवं ऑप्टीकल डिवाइस नाइट एण्ड डे विजन साइट्स और औजार
पैराशूट ब्रेक पैराशूट, मैन ड्रॉपिंग एवं रसद गिराने वाला पैराशूट
टूप कंफर्ट एवं सामान्य वस्तुएं तम्बू, परिधान, वैयक्तिक उपकरण, ब्रिजेज, नौकाएं, केबल्स इत्यादि

उत्पादन उपलब्धियां: वित्त वर्ष 2014-15 के दौरान कारोबार 11,364 करोड़ रुपए था । वर्ष 2015-16 के लिए अनुमानित कारोबार 14,158 करोड़ रुपए है । ओएफबी की करीबन 80 प्रतिशत आपूर्ति भारतीय सेना के लिए है ।

आधुनिकीकरणः ग्राहकों की वर्तमान और दीर्घकालिक भावी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आयुध निर्माणी बोर्ड (ओएफबी) पुरानी मशीनों के स्थान पर नवीनतम मशीने लगाकर अपनी मौजूदा सुविधाओं को निरंतर आधुनिक बना रहा है । इस संबंध में, बारहवीं पंचवर्षीय योजना के लिए एक व्यापक आधुनिकीकरण योजना की गई है । इस योजना के तहत, 2927 करोड़ रुपए का व्यय किया गया है ।

गुणवत्ता प्रबंधनः प्रक्रिया को निम्नलिखित उपायों के द्वारा सुदृढ़ किया गया है:- निजी कंपनियों के लिए आयुध निर्माणियों में परीक्षण की सुविधाएं मुहैया करायी गई हैं, विनिर्माण प्रक्रियाओं के लेखा परीक्षा के लिए दस गुणता लेखा परीक्षा समूहों (क्यूएजी) की स्थापना, शिकायतों का समाधान करने के लिए केन्द्रीय एवं अग्रेषण डिपुओं के साथ प्रत्यक्ष वार्ता के लिए टीमों की प्रतिनियुक्ति, प्रत्येक निर्माणी में असफलता समीक्षा बोर्ड का गठन जिसमें डीजीक्यूए का प्रतिनिधि सदस्य के रूप में शामिल होगा ।

उपलब्धियां एवं पुरस्कारः

  1. स्वदेशी रूप से अभिकल्पित एवं विनिर्मित 155 मिमीx45 कैलीबर आर्टिलरी गन (धनुष) का सफल परीक्षण ।
  2. ओएफबी द्वारा विकसित 155 मिमीx52 कैलीबर गन प्रणाली की देश में पहली बार 13 अगस्त, 2015 को पीएक्सई बालासोर में सफल प्रूफ फायरिंग ।
  3. गोलाबारू निर्माणी खड़की द्वारा पनडुब्बीरोधी रॉकेट आरजीबी-60 एवं आरजीबी-12 के लिए फ्यूज की प्रथम उत्पादित खेप भारतीय नौसेना को सितंबर, 2015 में जारी की गई है । .
  4. इन हाउस विकसित 7.62 मिमी त्रिचि असाल्ट राइफल का भारतीय तटरक्षक बल द्वारा अगस्त, 2015 में परीक्षण मूल्यांकन किया गया तथा भारतीय तटरक्षक बल की संक्रियाओं के लिए इसे शामिल करने की सिफारिश की है ।
  5. बाई-माड्यूलर चार्ज सिस्टम (बीएमसीएस) माड्यूल्स का स्वदेशी विकास ।
  6. चालू वर्ष के लिए सीएनबीसी-टीवी18 ओवर ड्राइव हॉल ऑफ फेम में मानद प्रवेशी के रूप में वाहन निर्माणी, जबलपुर (वीएफओ) का चयन किया गया है ।
  7. बड़े पैमाने पर विनिर्माणी करने वाले क्षेत्र की श्रेणी में राजीव गांधी राष्ट्रीय गुणता पुरस्कार-2013 के लिए आयुध निर्माणी, खमरिया (ओएफके) की घोषणा की गई है ।

स्वच्छ भारत मिशनः बुनियादी चिकित्सा सुविधा और स्वास्थ्य,स्वच्छता इत्यादि में सुधार के लिए आयुध निर्माणी, बड़माल, आयुध निर्माणी, खमरिया, आयुध निर्माणी, अंबाझरी, आयुध निर्माणी, इटारसी, आयुध निर्माणी, कटनी, आयुध निर्माणी, मेड़क ने समीपवर्ती गांवों को गोद लिया है ।

अधिक जानकारी के लिए लिंक पर जाएँ: ofbindia.gov.in)

2. गुणता आश्वासन महानिदेशालय (डीजीक्यूए)

गुणता आश्वासन महानिदेशालय(डीजीक्यूए) एक ऐसा अंतर सेवा संगठन है, जो रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग के अंतर्गत कार्य करता है । गुणता आश्वासन महानिदेशालय थल सेना, नौसेना के लिए (नौसेना आयुधों के अलावा) आयातित एवं स्वदेशी दोनों प्रकार के सभी रक्षा सामान और उपस्करों और वायुसेना के लिए निजी क्षेत्र, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों और आयुध निर्माणियों से अधिप्राप्त सामान्य उपभोक्ता मदों की गुणता आश्वासन के लिए उत्तरदायी है ।

संगठनात्मक ढांचा और कार्य

गुणता आश्वासन महानिदेशालय संगठन के ग्यारह तकनीकी निदेशालय हैं, जिनमें से प्रत्येक निदेशालय एक भिन्न प्रकार के उपकरण श्रेणी के लिए जिम्मेवार है । कार्यात्मक उद्देश्यों के लिए तकनीकी निदेशालयों को दो स्तरों में संरचित किया गया है, जिनमें उनके नियंत्रणालय और फील्ड स्थापनाएं शामिल हैं । इसके अलावा हथियारों और गोलाबारूदों की जांच करने के लिए जांच स्थापनाएं हैं ।

उपलब्धियां :

  1. सामान की गुणता आश्वासन : डीजीक्यूए न वर्ष 2015-16 के दौरान(नवंबर, 2015 तक) 15357.00 करोड़ रुपए के रक्षा सामान का निरीक्षण किया है ।
  2. डीजीक्यूए तकनीकी मूल्यांकनः वर्ष 2015-16 दिसंबर, 2015 तक की अवधि के दौरान , डीजीक्यूए द्वारा विभिन्न स्टोरों, गोलाबारूद एवं उपस्करों, जिसमें कई जटिल उपप्रणालियां शामिल हैं, के कुल 52 तकनीकी मूल्यांकन एवं .45 प्रयोक्ता परीक्षण में भाग लिया । वर्ष 2015-16 (दिसंबर, 2015 तक) के दौरान विभिन्न उपस्करों/स्टोर्स के 23 पीडीआई और 51 जेआरआई आयोजित किए गए थे । जिसमें कई जटिल उप-प्रणालियां भी शामिल हैं ।

भावी चुनौतियां: डीजीक्यूए को विक्रेता पंजीकरण की जिम्मेवारी पुनः सौंपी गई है । यह 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम के साथ रक्षा उद्योग में स्वदेशीकरण को मजबूती देगा और जिसके परिणामस्वरूप नए विक्रेताओं की संख्या में वृद्धि होगी । गुणवत्ता का एक समरूप मानक बनाए रखने और कठोर मूल्यांकरण के लिए समकृति प्रबंधन(पीएम) की संकल्पना अपनाई जा रही है ताकि सामग्री का इसके संपूर्ण जीवनकाल का तकनीकी साख नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके ।

आधुनिकीकरण: डीजीक्यूए ने अपनी विद्यमान जांच सुविधाओं को एनएबीएल अनुबंध के अनुरूप उन्नत किया है । यह स्वदेशीकरण के उद्देश्य हेतु निजी विक्रेताओं को प्रयोगशाला जांच सुविधा एवं प्रूफ सुविधाएं मुहैया करा रहा है । डीजीक्यूए ने विभागीय विनिर्देशनों के अतिरिक्त बीआईएस मानक और संयुक्त सेवा विनिर्देशनों की संरचना करने में निर्णायक भूमिका अदा की है ।

(अधिक जानकारी के लिए लिंक पर जाएँ: www.dgqadefence.gov.in)


3. वैमानिकी गुणता आश्वासन महानिदेशालय (डीजीएक्यूए)

वैमानिकी गुणता आश्वासन महानिदेशालय, रक्षा उत्पादन विभाग, रक्षा मंत्रालय के अधीन एक नियामक प्राधिकरण है, जो हवाई शस्त्रास्त्र और मानवरहित विमान(यूएवी) सहित सैन्य विमानों के सहायक हिस्से पुर्जों/सामान और अन्य वैमानिकी साजो-सामान के डिजाइन/विकास/उत्पादन/ओवरहॉल/मरम्मत आशोधन व उन्नयन कार्य करता है डीजीक्यूए रक्षा मंत्रालय सेना मुख्यालयों, सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा उपक्रमों व मूल्य ठेकेदारों को रक्षा एयर मदों की अधिप्राप्ति और इन-हाउस विनिर्माण के विभिन्न चरणोँ के दौरान तकनीकी परामर्श मुहैया कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है । डीजीक्यूए, प्रक्षेपास्त्र प्रणालियां, गुणता आश्वासन एजेंसी(एमएसक्यूएए) और सामरिक प्रणालियां गुणता आश्वासन समूह(एसएसक्यूएजी) के लिए नोडल एजेंसी भी है ।

स्वीकृत स्टोरों का मूल्यः चालू वर्ष एवं गत तीन वर्षों के दौरान डीजीक्यूए द्वारा क्यू करवेज दिए गए स्टोरों का मूल्य निम्नवत हैः-

(करोड़ रुपए में)

2011-12 2012-13 2013-14 2014-152015-16
14898 14022 21803 19829 23,067

वैमानिकी गुणता आश्वासन महानिदेशालय के अंतर्गत आश्वासन के अंतर्गत प्रमुख परियोजनाएं:

  1. विकास/विनिर्माण परियोजनाएं
    1. एसयू-30 (एमकेआई) और एडवांस्ड जेट ट्रेनर (एचएडब्ल्युके): मूल उपस्कर विनिर्माताओं से लाईसेंस के तहत विनिर्माण
    2. उन्नत हल्का हेलीकॉप्टर(एएलएच): विनिर्माण
    3. हल्का युद्धक विमान(एलसीएच): विकास एवं विनिर्माण
    4. हल्का उपयोगिता वाला हेलीकॉप्टर(विकास)
    5. हल्का युद्धक विमान(एलसीए): विनिर्माण
    6. मध्यवर्ती जेट ट्रेनर (आईजेटी) और हल्का युद्धक हेलीकॉप्टर (एलसीएच): विकास/विनिर्माणधान
    7. सारस परिवहन विमान(सैन्य रुपांतर): विकास
    8. पायलटरहित टारगेट विमान(पीटीए-लक्ष्य): विनिर्माण
    9. डोर्नियर (डीओ-228) विमान : निर्माण
    10. पैराशूट (ब्रेक, पायलट, ड्रोग, एंटी स्पिन, रिकवरी इत्यादि) : विकास/विनिर्माण
    11. हवाई आयुध स्टोर्स : विनिर्माण
    12. स्वदेशी मिसाइल : विकास/विनिर्माण
    13. वायु वाहित पूर्व चेतावनी रडार एवं नियंत्रण प्रणाली (एईडब्ल्यू एंड सी) : विकास
    14. वायु वाहित प्रयोगों के लिए भू-रडार प्रणाली : विकास/विनिर्माण
    15. विमान के लिए अरेस्टर प्रणालियां : विनिर्माण
    16. वायुयान कर्मी दल के लिए उड़ान के दौरान पहने जाने वाले वस्त्र : विकास/विनिर्माण
  2. मरम्मत एवं ओवरहाल (आरओएच) परियोजनाएं : एसयू-30 एमकेआई/मिग-21 बाइसन मिग -27 विमान/जगुआर/किरन जेट ट्रेनर/मिराज-2000 विमान, डोर्नियर (डीओ-228)/एव्रो (एचएस-748) (विमान), हेलीकॉप्टर, उदाहरण. चीता, चेतक, एएलएच, कलपुर्जे तथा एरो इंजन

नीतिगत महत्वपूर्ण निर्णय/उपलब्धियां:

  1. वायुवाहित मदों (इलेक्ट्रिकल तथा इलेक्ट्रॉनिक) और पर्यावरणीय स्ट्रेस स्क्रीनिंग के लिए भू-उपस्कर/परीक्षण उपस्कर (जिग्स) की अर्हता परीक्षण तथा स्वीकार्य परीक्षण प्रक्रिया के लिए दिशानिर्देशों पर एक्यूए निदेश जारी किए गए ।
  2. एलसीए के लिए डिजाइन, उत्पादन तथा सुपुर्दगी योग्य चरण के दौरान लागू औजार, परीक्षण उपस्कर तथा भू सहायता उपस्करों की गुणता आश्वासन तथा प्रमाणन के लिए दिशा निर्देश संबंधी दस्तावेज आरडीएक्यूए (एलसीए तेजस), बेंगलुरू द्वारा तैयार तथा समन्वित किया गया है ।
  3. एलसीए के लिए डीएमआरएल प्रयोगशाला हैदराबाद द्वारा विशेष एल्यूमिनियम एलॉय के स्वदेशी विकास के साथ-साथ प्रभावी क्यूए कवरेज उपलब्ध कराने में सहयोग के लिए दो डीजीएक्यूए अधिकारियों को डीआरडीओ अग्नि पुरस्कार प्रदान किया गया ।
  4. डीजीएक्यूए के 144 अधिकारियों ने गुणता आश्वासन तथा प्रबंधन संबंधी पाठ्यक्रम तथा प्रशिक्षणों में भाग लिया है ।

(अधिक जानकारी के लिए लिंक पर जाएँ: dgaeroqa.gov.in)


4. मानकीकरण निदेशालय (डीओएस)

मानकीकरण निदेशालय की स्थापना 1962 में रक्षा सेवाओं में मदों की अधिकता को नियंत्रित करने के उद्देश्य से की गई थी। मानकीकरण निदेशालय का मुख्य उद्देश्य तीनों रक्षा सेवाओं के बीच उपकरणों और घटकों में समानता स्थापित करना है ताकि रक्षा सेवाओं की समग्र माल सूची को कम से कम किया जा सकें। इन उद्देश्यों को निम्न माध्यमों से प्राप्त किया जा सकता हैः- (क) विभिन्न मानकी दस्तावेज तैयार करना, (ख) रक्षा वस्तु सूची का संहिताकरण, (ग) प्रविष्टि नियंत्रण।

लक्ष्य एवं उपलब्धियां :

2015-16 के रोल ऑन प्लान के अनुसार मार्च 2016 तक 156 नए दस्तावेज और 936 संशोधित दस्तावेज पूरे किए गए। 31 मार्च 2016 तक 5,257 मानकी दस्तावेज परिचालित किए गए। अध्यक्ष समिति मानकी उप- समितियों ने (सी सी एस एस सी) 2016 -17 के लिए रोल ऑन प्लान अनुमोदित किया है और 2016 -17 के लिए 1014 मानकी दस्तावेज तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

मौजूदा कॊडिफिकेशन प्रणाली को प्रभावी तथा परिमाणात्मक बनाने के लिए प्लेटफार्म केन्द्रक कोडिफिकेशन शुरू किया गया है । भविष्य में पिछले वर्ष में अंतिम रूप दी गई संविदाओं के आधार एएचएसपी के कोडिफिकेशन लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे ।

संबद्ध समिति/135(एसी/135) की मुख्य सामूहिक बैठकों में भारत की भागीदारी, नाटो के अधीन संहिताकरण की प्रमुख संस्था संहिताकरण और अंतर्राष्ट्रीय संभारिकी प्रणाली में भारतीय उत्पादकों की भागीदारी में सहयोग करने की दिशा में नई संकल्पना को लाया।

वर्तमान संहिताकरण प्रणाली को प्रभावी और परिमाणात्मक बनाने के उद्देश्य से मुख्य केन्द्रिक संहिताकरण के रूप में बनाया गया है। भविष्य में, एएचएसपी के लक्षित संहिताकरण को गत वर्षों में अंतिम रूप दी गई निविदाओं के अनुसार किया जाएगा।

मानकीकरण निदेशालय के निदेशक द्वारा एनसीबी जर्मनी एवं संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ संहिताकरण डाटा एवं सूचना साझा करने के लिए द्विपक्षीय समझौतों पर क्रमशः 18 नवंबर 2015 एवं 18 फरवरी 2016 को हस्ताक्षर किए गए थे।

मेक इन इंडिया योजना के लिए प्रयत्नः संबद्ध समिति/135 (एसी/135) के सदस्य के तौर पर, मानकीकरण निदेशालय प्रमुख रूप से भारतीय उद्य़ोग को अंतर्राष्ट्रीय रक्षा खरीद प्रणाली में भागीदारी के लिए सहयोग करता है।

(अधिक जानकारी के लिए लिंक पर जाएँ: ddpdos.gov.in)

5. योजना और समन्वय महानिदेशालय

वर्ष 1964 में स्थापित योजना एवं समन्वय निदेशालय को स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने और एसएचक्यू के पूंजीगत अधिग्रहण प्रस्तावों पर डीडीपी के परिप्रेक्ष्य में सलाह देते हुए रक्षा क्षेत्र 'मेक इन इंडिया' पहल के लक्ष्यों को मूर्तरूप देने, रक्षा अधिप्राप्ति प्रक्रिया में संशोधन का प्रस्ताव करने, नीति/दिशानिर्देशों को रूप देना/स्वीकृति देने निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहन देने तथा भारत और विदेशी कंपनियों के बीच अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में वृद्धि करने का कार्य सौंपा गया है । रक्षा जरूरतों में मूल रूप से आत्मनिर्भरता के समग्र लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए प्रयोक्ता तथा अन्य पणधारियों के साथ निकट संपर्क रखते हुए इन कार्यकलापों को किया जाता है ।