संबद्ध कार्यालय

गुणता आश्वासन महानिदेशालय (डीजीक्यूए)

गुणता आश्वासन महानिदेशालय एक ऐसा गुणता आश्वासन संगठन है जो रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग के अंतर्गत कार्य करता है । गुणता आश्वासन महानिदेशालय थल सेना, नौसेना के लिए(नौसेना आयुधों के अलावा) आयातित एवं स्वदेशी दोनों प्रकार के सभी रक्षा भंडारों और उपस्करों और वायुसेना के लिए निजी क्षेत्र, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों और आयुध निमिर्णियों से अधिप्राप्त सामान्य उपभोक्ता मदों के लिए सेकेंड पार्टी गुणता आश्वासन के लिए उत्तरदायी है । अतः देश की रक्षा तैयारियों में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है ।

संगठनात्मक ढांचा और कार्य

गुणता आश्वासन महानिदेशालय संगठन ग्यारह तकनीकी निदेशालयों से संरचित है जिनमें से प्रत्येक निदेशालय एक भिन्न प्रकार के उपकरण श्रेणी के लिए जिम्मेवार है । कार्यात्मक उद्देश्यों के लिए तकनीकी निदेशालयों को दो स्तरों में संरचित किया गया है जिनमें उनके नियंत्रणालय और फील्ड स्थापनाएं शामिल हैं । इसके अलावा हथियारों और गोलाबारूदों की जांच करने के लिए जांच स्थापनाएं हैं ।

उपलब्धियां :

  1. स्टोरों की गुणता आश्वासन 2015-16 के दौरान गुणवत्ता सुनिश्चित किए गए स्टोरों का मूल्य 15357.00 करोड़ रुपए है ।
  2. आधुनिकीकरणःअत्याधुनिक प्रौद्योगिकी वाले जांच उपकरणों की अधिप्राप्ति की गई है और उन्हें प्रूफ स्थापनाओं और जांच स्थापनाओं में कार्य पर लगाया गया है । डीजीक्यूए ने एनएबीएल प्रावधानों के अनुरूप अपनी मौजूदा परीक्षण सुविधाओं का उन्नयन किया है । डीजीक्यूए स्वदेशीकरण के उद्देश्य के लिए निजी विक्रेताओं को भी प्रयोगशाला परीक्षण सुविधाएं एवं प्रूफ सुविधाओं मुहैया करा रहा है । डीजीक्यूए, बीआईएस मानकों को और विभागीय विनिर्दिष्टियों के अलावा ज्वाइंट सर्विस स्पेसीफिकेशन्स को निरूपित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है ।
  3. डीजीक्यूए के तकनीकी मूल्यांकन; वर्ष 2014-15 के दौरान डीजीक्यूए ने कुल 77 तकननीकी मूल्यांकन किए और विभिन्न स्टोरों, गोलाबारूद और उपस्करों जिसमें कई जटिल उपप्रणालियां भी शामिल थीं, के 60 प्रयोक्ता परीक्षणों में भाग लिया । वर्ष 2014-15 के दौरान विभिन्न उपस्करों/स्टोर्स के 31 पीडीआई और 58 जेआरआई किए गए ।
  4. भावी चुनौतियां:- :- विक्रेता पंजीकरण की जिम्मेवारी फिर से डीजीक्यूए को सौंपी गई है । मेक इन इंडिया कार्यक्रम के साथ रक्षा उद्योग में स्वदेशीकरण को बल मिलेगा और परिणामस्वरूप नए विक्रेताओं की संख्या में वृद्धि होगी । गुणवत्ता के सम्यक मानक बनाए रखने के लिए और डीजीक्यूए द्वारा अपनाए जा रहे कठोर मूल्यांकनों का अनुपालन करने की दृष्टि से समाकृति प्रबंधन(सीएम) संकल्पना अपनाई जा रही है । इस सीएम का उद्देश्य रक्षा की उल्लेखित आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आपूर्तिकर्ताओं को उन लागत प्रभावी डिजाइन जो रक्षा की उल्लिखित आवश्यकताओं को पूरा करते हों, पर्याप्त स्वतंत्रता देते हुए सामग्री के सम्पूर्ण जीवन काल का तकनीकी नियंत्रण सुनिश्चित करना होगा ।

वैमानिकी गुणता आश्वासन महानिदेशालय (डीजीएक्यूए)

वैमानिकी गुणता आश्वासन महानिदेशालय भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग के अधीन एक नियामक प्राधिकरण है, जो हवाई शस्त्रास्त्र और मानवरहित विमान(यूएवी) सहित सैन्य विमानों के सहायक हिस्से पुर्जों और अन्य वैमानिकी साजो-सामान को उनके डिजाइन, विकास, उत्पादन व ओवरहाल और मरम्मत के दौरान गुणता आश्वासन और अंतिम स्वीकृति देने के लिए एक नियामक प्राधिकरण है । डीजीएक्यूए रक्षा मंत्रालय, सेना मुख्यालयों, मुख्य संविदाकारों को रक्षा एयरो सामान के अर्जन और घरेलू विनिर्माण के विभिन्न चरणों में तकनीकी सहायता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । यह ऐसे उत्पादों के आपूर्तिकर्ताओं के परिसर में यह सुनिश्चित करता है कि उत्पाद और सेवाएं निर्धारित विर्निदष्टियों/मानकों के अनुरूप हों और गुणता प्रबंधन प्रणाली प्रभावी हो और इस प्रकार सैन्य विमानों/एयरबोर्न प्रणालियों की सुरक्षा में वृद्धि करता है । डीजीएक्यूए देश के विभिन्न भागों में अवस्थित 34 फील्ड स्थापनाओं/डिटैचमेंटस के एक नेटवर्क के माध्यम से अपने नई दिल्ली स्थित मुख्यालय से कार्य करता है ।

डीजीएक्यूए, प्रेक्षपास्त्र प्रणालियां गुणता आश्वासन एजेंसी(एमएसक्यूएए) और सामरिक प्रणालियां गुणता आश्वासन समूह(एसएसक्यूएजी) के लिए एक नोडल एजेंसी भी है । ये त्रिसेवा (डीजीएक्यूए, डीजीक्यूए और डीजीएनएआई) संगठन हैं, जो स्वदेशी प्रक्षेपास्त्रों के डिजाइन, विकास एवं उत्पादन के दौरान गुणता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हैं ।

वर्तमान वर्ष और पिछले 4 वर्षों के दौरान वैमानिकी गुणवत्ता आश्वासन महानिदेशालय द्वारा गुणता कवरेज दिए गए स्टोरों की कीमत का ब्यौरा नीचे दिया गया है :

वर्ष 2010-11 2011-12 2012-13 2013-14 2014-15
करोड़ रुपए में 14296 14898 14022 21803 19829
  1. वैमानिकी गुणता आश्वासन महानिदेशालय के अंतर्गत आश्वासन कवरेज के तहत प्रमुख परियोजनाएं:

    1. एसयू-30 (एमकेआई) और एडवांस्ड जेट ट्रेनर (एचएडब्ल्युके): मूल उपस्कर विनिर्माताओं से लाईसेंस के तहत विनिर्माण
    2. एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर(एएलएच): विनिर्माण
    3. हल्का युद्धक विमान(एलसीएच): विकास
    4. हल्का युद्धक विमान(एलसीए): विनिर्माण
    5. मध्यवर्ती जेट ट्रेनर (आईजेटी), हल्का युद्धक हेलीकॉप्टर (एलसीएच) और हल्का उपयोगी हेलीकॉप्टर(एलयूएच): विकास एवं अनुसंधान
    6. हवाई आयुध स्टोर्स: विनिर्माण
    7. घरेलू मिसाइलें: विकास/विनिर्माण
    8. एयर वार्न अर्ली वार्निंग रडार नियंत्रण प्रणाली (एईडब्ल्यु&सी): विकास
    9. वायु वाहित प्रयोगों के लिए भू-रडार प्रणालियां: विकास और विनिर्माण
    10. विमान के लिए एरेस्टर बैरियर प्रणालियां : विनिर्माण
    11. वायुकर्मियों के लिए उड़ान के दौरान पहने जाने वाले वस्त्र : विकास/विनिर्माण
    12. सैनिक विमान में उपयोग के लिए टायर/ट्यूब्स: विकास/विनिर्माण
    13. सैनिक विमान में उपयोग के लिए बैटरीजः विकास/विनिर्माण
    14. एयरक्राफ्ट टायर विनिर्माण एवं रिट्रीडिंग
  2. मरम्मत एवं ओवरहॉल (आरओएच) परियोजनाएं

    1. एसयू-30 एमकेआई/मिग-21 बाइसन विमान
    2. जगुआर/किरन जेट ट्रेनर/मिराज-2000 विमान
    3. डोर्नियर (डीओ-228)/एव्रो (एसएच-748) विमान

गुणता आश्वासन महानिदेशालय द्वारा किए गए कुछ उपायः

  1. वायुवाहित मदों(इलेक्ट्रीकल तथा इलेक्ट्रानिक और पर्यावरीणीय स्ट्रेस स्क्रीनिंग के लिए भी-उपस्कर/परीक्षण उपस्कर(जिग्स) के अर्हता परीक्षण प्रक्रिया तथा स्वीकृति परीक्षण प्रक्रिय के लिए दिशानिर्देशों पर एक्यूए निदेश जारी किया ।
  2. एचसीए के लिए डिजाइन, उत्पादन तथा सुपुर्दगी योग्य चरण के दौरान लागू औजार, परीक्षण उपस्कर तथा भू- सहायता उपस्करों के गुणता आश्वासन तथा प्रमाणन के लिए दिशानिर्देश संबंधी दस्तावेज आरडीएक्यूए(एलसीए, तेजस बैंगलौर द्वारा) तैयार तथा समन्वय किया गया है ।
  3. एलसीए के लिए डीएमआरएल प्रयोगशाला हैदराबाद में विशेष एल्यूमिनियम एलॉय के स्वदेशी विकास के दौरान प्रभावी क्यूए कवरेज उपलब्ध कराने में सहयोग के लिए दो डीजीएक्यूए अधिकारियों को डीआरडीओ अग्नि पुरस्कार प्रदान किया गया ।

मानकीकरण निदेशालय (डीओएस)

मानकीकरण निदेशालय की स्थापना 1962 में रक्षा सेनाओं के भीतर मदों की तेज वृद्धि को नियंत्रित करने के उद्देश्य से की गई थी । तदनुसार मानकीकरण महानिदेशालय का प्राथमिक उद्देश्य तीनों सेनाओं में उपस्करों और संघटकों में उभयनिष्ठा स्थापित करना है ताकि रक्षा सेवाओं की कुल मदसूची को कम करके न्यूनतम किया जा सके । निम्नलिखित द्वारा इस उद्देश्य को प्राप्त करने का प्रयास है :

  1. विभिन्न मानकीकरण दस्तावेजों को तैयार करना ।
  2. रक्षा सामान सूची का संहिताकरण ।
  3. प्रविष्टि नियंत्रण ।

मानकीकरणः लक्ष्य एवं उपलब्धियां

निदेशालय द्वारा अनुमोदित पंचवर्षीय रोल-ऑन योजना के अनुसार, दिसम्बर, 2015 तक 89 नए मानक दस्तावेज और 761 पुनरीक्षित दस्तावेज पूरे कर लिए गए हैं । लगभग 5,500 मानकीकरण दस्तावेजों को 31 दिसम्बर, 2015 तक परिचालित किया गया है

संहिताकरणः उपलब्धियां

सामान्यतया व पूरे विश्व में संहिताकरण के क्षेत्र में विशेषकर संहिताकरण भारत में अनेक परिवर्तन हुए हैं । एलाइड समिति/135(एकी(1315), की की मुख्य समूह बैठक जो नाटो के अंतर्गत संहिताकरण का सर्वोच्च निकाय है में भारत के भाग लेने से , संहिताकरण की दिशा में नए पहलू लाए गए हैं अंतरराष्ट्रीय संभारिकी प्रणाली में भारतीय विनिर्माताओं की भागीदारी के लिए समर्थन मिला है । इसकी विशेषताएं नीचे दी गई हैं ।

    1. प्रि-इंडक्सन संहिताकरणः प्री-इंडक्सन संहिताकरण जहां विनिर्माता संहिताबद्ध आँकड़े मुहैया करान के लिए वचनबद्ध होतो हैं, में दिनेश सिंह समिति द्वरा रक्षा अधिप्राप्ति प्रक्रिया में संशोधन के लिए सिफारिश की गई है ।
    2. प्लेटफार्म केन्द्रीकृत संहिताकरणः मौजूदा संहिताकरण प्रणाली को प्रभावी और परिमाणात्मक बनाने के लिए, प्लेटफार्म केन्द्रित संहिताकरण की शुरूआत की गई है । भविष्य में एएचएसपी के संहिताकरण लक्ष्य पिछले वर्षों में अंतिम रूप दी गई संविदाओं के अनुसार निर्धारित किए जाएंगे ।
    3. मानकीकरण निदेशालय के निदेशक द्वारा 18 नवंबर, 2015 को एनसीसी जर्मनी के साथ संहिताकरण सूचना को बांटने के लिए द्वीपक्षीय समझौता पर हस्ताक्षर किया गया। संयुक्त राज्य अमेरिका से सूचना बांटने का द्वीपक्षीय समझौता अभी अंतिम रूप दिए जाने के अग्रिम चरण में है
    4. 4. 'मेक इन इंडिया' परियोजना हेतु प्रयासः एलाइड समिति /15(एजी/135), के एक सदस्य के रूप में मानकीकरण निदेशालय भारतीय उद्योग को अंतरराष्ट्रीय रक्षा अधिप्राप्ति प्रणाली में भागीदारी के लिए सहायता देने हेतु सक्रिय तौर पर शामिल किया जाता है ।
      इस कार्य के हिस्से के तौर पर निम्नलिखित कार्य शुरू किए गए :-
      1. एससीएजीई प्राप्त करने के लिए भारतीय विनिर्माता के पंजीकरण के लिए मानकीकरण निदेशालय एसी/135 को मदद कर रहा है, जो नाटो देश के व्यापार के लिए अपरिहार्य है ।
      2. भारतीय उद्योग का ग्राहक आधार व्यापक बनाने के लिए भारतीय उद्योग के लिए जागरुकता लाने के लिए एसी/135 के एनएमसीआरएल के डाटाबेस में भागीदारी को एरो इंडिया 2015 के दौरान भी बढ़ाया गया था ।
      3. एनसीबी इंडियाः निदेशालय ने संहिताकरण और एससीएजीई प्रस्तुती पर जागरूकता फैलाने के लिए एनसीबी की वेबसाइट स्थापित की है ।

योजना और समन्वय महानिदेशालय

रक्षा उत्पादन विभाग के तहत योजना और समन्वय निदेशालय में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग प्रभाग, रक्षा उत्पादन विभाग में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से संबंधित कार्यकलापों के लिए एक केंद्रीय बिंदु है । यह विभिन्न देशों जिनके साथ भारत का रक्षा उत्पादन में सहयोग समझौता है, के साथ रक्षा उद्योग सहयोग से संबंधित सभी मामलों को देखता है ।